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बुधवार, 6 मार्च 2013

सियासी ग्राम सिंहो का हिन्दू-मुसलमान:- डॉ. कुमार विश्वास

हा हा हा ! कितने डरपोक है ये सियासी "ग्राम-सिंह"? ज़रा सा जनता जागी नहीं कि लगे "हिन्दू-मुसलमान"."ओवेसी-तोगड़िया","मंदिर-मस्जिद" पर हल्ला मचाने. क्यूंकि जानते हैं कि...
"अगर हाथों से उम्मीदों का शीशा टूट जाता है,तो पल भर में ही ख्वाबों से भी पीछा छूट जाता है....अगर हम लोग थोड़ी देर लड़ना भूल जाते हैं ,सियासी सूरमाओं का पसीना छूट जाता है .......!"
एक लघुकथा पढ़िए शायद आप के आगे इनके रंग उतरें और आप में "देश-राग" ज्यादा जोर से गूंजे...
**********गुरू-चेला संवाद { असगर वजाहत }*******


गुरु-- "चेला, हिन्दू-मुसलमान एक साथ नहीं रह सकते।"
चेला-- "क्यों गुरुदेव?"
गुरु-- "दोनों में बड़ा अन्तर है।"
चेला-- "क्या अन्तर है?"
गुरु-- "उनकी भाषा अलग है...हमारी अलग है।"
चेला-- "क्या हिन्दी, कश्मीरी, सिन्धी, गुजराती, मराठी, मलयालम, तमिल, तेलुगु, उड़िया, बंगाली आदि भाषाएँ मुसलमान नहीं बोलते...वे सिर्फ़ उर्दू बोलते हैं?"
गुरु-- "नहीं...नहीं, भाषा का अन्तर नहीं है...धर्म का अन्तर है।"
चेला-- "मतलब दो अलग-अलग धर्मों के मानने वाले एक देश में नहीं रह सकते?"
गुरु-- "हाँ...भारतवर्ष केवल हिन्दुओं का देश है।"
चेला-- "तब तो सिखों, ईसाइयों, जैनियों, बौद्धों, पारसियों, यहूदियों को इस देश से निकाल देना चाहिए।"
गुरु-- "हाँ, निकाल देना चाहिए।"
चेला-- "तब इस देश में कौन बचेगा?"
गुरु-- "केवल हिन्दू बचेंगे...और प्रेम से रहेंगे।"
चेला-- "उसी तरह जैसे पाकिस्तान में सिर्फ़ मुसलमान बचे हैं और प्रेम से रहते हैं?"


डॉ. कुमार विश्वास..

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